“क्षेत्रीय स्वतंत्रता आंदोलन माइक्रोस्कोप है।”- डॉ. रविशंकर

National"क्षेत्रीय स्वतंत्रता आंदोलन माइक्रोस्कोप है।"- डॉ. रविशंकर

‘’भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में लिखा गया है लेकिन आम जन के संघर्ष और उनके त्याग को विस्मृत कर दिया गया है। क्षेत्रीय स्वतंत्रता आंदोलन माइक्रोस्कोप की तरह है, इसलिए आवश्यक है कि स्वाधीनता संग्राम को आम आदमी के नजरिये से क्षेत्रीय स्तर पर इतिहास पुन: लिखा जाए।’’ यह बात टीएनबी कॉलेज के इतिहास के सहायक प्राध्यापक डॉ. रविशंकर कुमार चौधरी द्वारा बताई गई। डॉ.चौधरी हेरीटेज सोसाईटी, पटना एवं डॉ. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू (मध्य प्रदेश) के संयुक्त तत्वावधान में आजादी का “अमृत महोत्सव” के अवसर पर ‘अंग प्रदेश में स्वतंत्रता आंदोलन’विषय पर बोल रहे थे।

डॉ.चौधरी ने कहा कि स्वाधीनता संग्राम के कालखंड में अंग प्रदेश का उदय नहीं हुआ था। उन्होंने इतिहास के संदर्भ में कहा कि अंग प्रदेश का उल्लेख छठीं शताब्दी में मिलता है। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि यह दानवीर कर्ण की राजधानी हुआ करती थी। उन्होंने इतिहास में उपलब्ध जानकारी के आधार पर बताया कि अंग प्रदेश सम्राट अशोक का ननिहाल था।

स्वाधीनता संग्राम की चर्चा करते हुए डॉ. चौधरी ने कहा कि तिलका मांझी ने बगावत का पहला बिगुल फूंका था, उन्होने गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाई थी। डा.चौधरी ने बताया कि गांधीजी के प्रवेश के बाद अंग प्रदेश में स्वाधीनता संग्राम में एक नई उबाल आयी। 1920 में गांधीजी पहली बार भागलपुर पहुंचे थे। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि शैतान को सत्य और अहिंसा से पराजित किया जा सकता था। पूर्ण स्वराज और असहयोग आंदोलन की चर्चा करते हुए शराबबंदी, जाति वैमनस्य के बारे में भी लोगों को सचेत किया। उन्होंने स्वाधीनता संग्राम के अनेक परिचित और अज्ञात वीर सेनानियों का उल्लेख करते हुए कई प्रसंग सुनाये।

वेबीनार की अध्यक्ष आई.सी.सी.आर.दिल्ली की पूर्व डायरेक्टर डॉ. नीरू मिश्रा ने ब्राउस के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए वेबीनार के विषय पर प्रकाश डाला। डॉ. मिश्रा ने कहा कि कुलपति प्रो. आशा शुक्ला अमृत महोत्सव के इस संकल्प को साकार करने के लिए लगन के साथ मेहनत कर रही हैं और हम सबको प्रेरित भी कर रही हैं। कार्यक्रम में स्वागत वक्तव्य हेरीटेज सोसाईटी के महानिदेशक डॉ.अनंताशुतोष द्विवेदी ने किया एवं आभार वाकतव्य योगिक साइंस विभाग के डॉ.अजय दुबे द्वारा किया गया। वेबीनार का संचालन प्रशासनिक सलाहकार डॉ शैलेन्द्र मिश्र ने किया। वेबीनार के सफल संचालन के लिए डीन डॉ.डी.के वर्मा, डॉ० मनीषा सक्सेना, डीन, ब्राउस एवं रजिस्ट्रार श्री अजय वर्मा के साथ विश्वविद्यालय परिवार का सहयोग रहा।

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