Adwait Bahuguna
जिन्ना – मै तुममें पाकिस्तान की ताकत देखता हूं, बर्मा के मोर्चे पर तुम्हारी बहादुरी के किस्से सुने हैं मैने ।
उस्मान – पाकिस्तान और ताकत ? जनाब दिन में सपने न देखा करें तो आपके पैदा होने वाले मुल्क के लिये बेहतर होगा ।
जिन्ना – तुम तो मुसलमान हो तुम्हें पाकिस्तान की तरफ होना चाहिए ।
उस्मान – ये जिस्म हिन्दोस्तां की मिट्टी से बना है पाकिस्तान की नहीं । जनाब मेरा वक्त न जाया कीजिये ।
जिन्ना – पाकिस्तान आ जाओ ! मैं तुम्हें आर्मी चीफ बना दूंगा ।
उस्मान – जनाब आपको पहले भी बता चुका हूं कि ये जिस्म हिन्दोस्तां की मिट्टी से बना है और हिन्दोस्तां की ही हिफाजत में फनाॅ होगा ।
ये बातचीत है 1946 अप्रैल में मोहम्मद अली जिन्ना और ब्रिगेडियर उस्मान के बीच । (द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिगेडियर उस्मान की वीरता के किस्से चर्चा में थे ।)
मोहम्मद उस्मान ने 10वीं बलूच रेजिमेंट की 14वीं बलाटियन की कमान अप्रैल 1945 से अप्रैल 1946 तक संभाली, इसी दौरान जिन्ना उनके पास पाकिस्तान चलने का ऑफर लेकर आए थे। बंटवारे के बाद जब बलूच रेजिमेंट पाकिस्तान में चली गई तो मोहम्मद उस्मान का ट्रांसफर डोगरा रेजिमेंट में कर दिया गया। डोगरा रेजिमेंट में अपने साथी सैनिकों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए मोहम्मद उस्मान शाकाहारी हो गए ।
कश्मीर को हासिल न कर पाने की टीस पाकिस्तान के मन में हमेशा से थी. पाकिस्तान ने 1947 में कबायली घुसपैठियों को जम्मू-कश्मीर की रियासत में भेजा । मोहम्मद उस्मान उस वक्त 50 पैरा ब्रिगेड के कमांडर थे और उन्हें नौशेरा की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी।
5000 कबायली नौशेरा में आ चुके थे वे मस्जिद की आड़ लेकर भारतीय सेना पर फायरिंग कर रहे थे, भारतीय सेना मस्जिद होने की वजह से कबायलियों पर जवाबी फायरिंग करने से हिचकिचा रही थी, ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान सामने आए और कबायलियों पर टूट पडे । 1032 कबायली जमींदोज हो गये बाकी के उल्टे पांव भाग लिये ।
ब्रिगेडियर उस्मान को नौशेरा का शेर कहा जाने लगा । मई 1948 में पाकिस्तान की रेगुलर आर्मी ने एक बार फिर भयंकर गोलीबारी और शेलिंग शुरू कर दी।
भयंकर युद्ध छिड गया , ब्रिगेडियर उस्मान अपनी टुकड़ी के साथ पाकिस्तानी फौज को धकेलते जमींदोज करते नौसेरा से झांगर पोस्ट पहुंच चुके थे पोस्ट पर तिरंगा फहराने के दौरान 3 जुलाई 1948 के दिन एक तोप का गोला ब्रिगेडियर उस्मान के पास आकर फट गया !
अपने 36 वें जन्मदिन के 12 दिन पहले आजमगढ में पैदा हुआ ये शेर ब्रिगेडियर उस्मान ! जिन्ना को किये गये वादे को पूरा कर भारत मां की गोद में फनां हो कर सो गया । हिन्दुस्तान का प्रधानमंत्री उस शेर को कांधां देने जामिया मिल्लिया पहुंचा । और एक स्वर में हिन्दोस्तां ने कहा “महावीर चक्र” ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान – अमर रहे अमर रहे ।


