Md Umar Ashraf
एक जैसे मामले में मोकामा विधायक अनंत सिंह को हफ़्ते भर में लोवर कोर्ट से दो बार सज़ा होना और फिर उनसे विधायक का पद छीन जाना, शुरू में सिर्फ़ एक आम घटना लग रही थी। पर पिछले चार पाँच दिन में जो घटना हुई है, उसने बहुत कुछ साफ़ कर दिया है।
मोकामा सीट पर अनंत सिंह की दावेदारी से अगर किसी को सबसे अधिक ख़तरा है तो वो हैं, बिहार के मुख्यमंत्री के दोनो हाथ यानी ललन सिंह को। पिछले कुछ साल से नितीश कुमारी से बाग़ी हुए अनंत सिंह लगातार ललन सिंह के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। इसका असर 2019 का लोकसभा चुनाव में मुंगेर सीट को सबने देखा।
ये सीट वैसी ही थी जैसे बेगुसराय से RJD किसी भी हाल में कन्हैया कुमार को जीतता नही देखना चाहती थी, वैसे ही मुंगेर को किसी भी हाल में अनंत सिंह के पाले में ललन सिंह और नितीश कुमार नही जाने देना चाहते थे। इसके लिए जो बन सका उन्होंने किया। अपने दम पर अनंत सिंह ने पहले तो अपनी पत्नी के लिए कांग्रेस का टिकट हासिल किया। और जिस मज़बूती से लड़े, वो अपने में यूनीक था।
फिर 2020 में उन्होंने उस RJD से ख़ुद के लिए मोकामा से टिकट हासिल किया, जिसने 2015 में उन्ही के विरोध पर पूरे बिहार में चुनाव लड़ा था, पूतूस यादव हत्याकांड ही 2015 का सबसे महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा था। और जेल से ही अनंत सिंह ने 2020 में चुनाव लड़ा और बड़ी मार्जिन से चुनाव जीता भी। ख़ुद तेजस्वी यादव ने बिहार चुनाव में प्रचार की शुरुआत मोकमा के मेकरा से अनंत सिंह के पक्ष में वोट माँग कर की थी। ये बिहार में भूमिहार और यादव को जोड़ने की पहली बड़ी शुरुआत थी। इसका असर दिखा भी…
अब चूँकि सरकार बदल चुकी है, नितीश कुमार और ललन सिंह की दोस्ती अब तेजस्वी यादव से वापस हो चुकी है, वैसे अब अनंत सिंह का क्या होगा ?? अनंत सिंह अब विधायक नही रहे, मोकामा सीट पर जल्द ही वोट पड़ेगा, यानी उपचुनाव होगा। वैसे में RJD क्या मोकामा सीट पर अपनी दावेदारी बरक़रार रखेगी ? और अनंत सिंह के किसी पसंदीदा उम्मीदवार को टिकट देगी।
या फिर नितीश कुमार और ललन सिंह के दबाव में आ कर अनंत सिंह से छुटकारा चाहेगी.? वैसे अगर तेजस्वी यादव अनंत सिंह के समर्थन में जाते हैं तो ललन सिंह की सियासत कमज़ोर पड़ेगी। लेकिन क्या नितीश कुमार ये कभी होने देंगे, ललन सिंह उनकी कमज़ोरी और मजबूरी दोनो हैं ?? अगर तेजस्वी यादव अनंत सिंह से दूरी बना लेते हैं तो फिर अनंत सिंह के पास क्या ऑप्शन रह जाएगा ??
मेरे अनुसार कुछ चीज़ इस तरह की हो सकती हैं, चूँकि अनंत सिंह RJD के सदस्य हैं, उनकी पत्नी कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। वैसे में थोड़ी बहुत दबाव की सियासत कांग्रेस भी करेगी, क्यूँकि उनके पास अखिलेश सिंह हैं, वो किसी भी हाल में अनंत सिंह को ख़ुद से दूर नही करना चाहेंगे। उसके बाद बेगुसराय में कन्हैया कुमार की दावेदारी। कुल मिला कर इन दो सीटों को लेकर इनमें कुछ समझौता ज़रूर होगा। किसी एक को ज़रूर झुकना होगा। झुकता कौन है ये तो वक़्त बताएगा।
बाक़ी अनंत सिंह का जो मिज़ाज है, तो वो मज़बूती से लड़ने वाले इंसान हैं। वो पहले तो किसी मज़बूत सियासी पार्टी से गठजोड़ करना चाहेंगे। और वो पार्टी कौन हो सकती है ?? भाजपा, लोजपा, लोजपा(चिराग़)
भाजपा का तो मामला खुला है; अगर वो वहाँ जाना चाहें तो उन्हें अपना भी लिया जाएगा। जहां तक लोजपा की बात है, वहाँ सूरजभान सिंह हैं, अगर वो अनंत सिंह के साथ गए तो फिर अनंत सिंह उनके साथ भी जा सकते हैं। वर्ना फिर चिराग़ पासवान को तो अपनी सियासत के लिए अनंत सिंह जैसों की तो बहुत सख़्त ज़रूरत है।
कुल मिला कर मोकामा जहां मेरी पैदाइश हुई है, वहाँ का उपचुनाव बिहार की सियासत का रुख़ तय करेगा।


