आज 11 नवंबर 2012 को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, मौलाना आजाद की याद में क़ौम ने अपने महान नेता और महान लेखक को बड़ी धूमधाम से याद किया। मौलाना आजाद ने स्वतंत्र भारत के अगले साठ सत्तर वर्षों के लिए राष्ट्र शिक्षा के लिए बड़ी मज़बूत बुनियाद प्रदान की थी। अगर चि उनहें काम करने के लिए दस ग्यारह साल ही मिले, लेकिन इस थोड़े अरसे में बड़े बड़े काम कर गए। विज्ञान संस्थानों के विकास के लिए, तकनीकी शिक्षा के लिए, यहां तक कि युनिवर्सिटी ग्रान्ट कमीशन की स्थापना भी कर गए, जो सभी विश्वविद्यालयों के विकास के लिए एक महान आधार है।
शिक्षा संपूर्ण मनुष्य को बनाने की एक प्रक्रिया है और इसके लिए यह आवश्यक है कि धर्मनिरपेक्ष भारत में शिक्षा का मूल मानचित्र इस तरह बने कि हिंदुओं, मुसलमानों, सिखों, ईसाइयों में भेद भाव बढ़ने का कोई मौका न मिले, बल्कि शिक्षा ऐसा होना चाहिए कि हर भारतीय को आगे बढ़ने का मौका मिले, चाहे उसका धर्म कुछ भी हो, उसकी जाति जो भी हो। इसी वजह से मौलाना आज़ाद ने आज़ादी से बीस-तीस साल पहले बुनियादी काम किया था कि जाति, पात, धर्म के भेद मिटा दिए जाएं। अपने वतन के विकास के लिए अपने सारी कोशिशों को समर्पित कर दें। इसी विषय पर मौलाना ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक तारजुमपनुल कुरान लिखी, जिसमें उन्होंने धर्मों की एकता की थीसिस प्रस्तुत की।
इसका हिन्दी अनुवाद खुदा बख़्श पुस्तकालय प्रकाशित भी करेगा। इस महत्वपूर्ण कार्य की ओर खुदा बख्श पुस्तकालय के निदेशक डॉ शाइस्ता बीदर ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया कि धर्मों की एकता और इस एकता की सच्चाई के लिए एक केंद्र की स्थापना खुदा बख़्श पुस्तकालय में की जानी चाहिए। बल्कि इस एक सच्चाई और एकता के लिए विश्वविद्यालयों में एक कोर्स शुरू किया जाना चाहिए। डॉ. शाइस्ता ने मुख्यमंत्री के संज्ञान में यह भी लाया कि मौलाना आजाद के संबंध बिहार से इतने पुराने हैं कि वह बचपन में खुदा बख्श पुस्तकालय में कलकत्ता से पटना तक आते थे और यहां की धरोहर का लाभ उठाकर अपने ज्ञान को अद्यतन करते थे। .. खुदा बख्श ने मौलाना आजाद के बिहार के साथ संबंधों पर एक किताब भी प्रकाशित की है।
देश के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद जी की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। pic.twitter.com/ROEQJkkWSL
— Nitish Kumar (@NitishKumar) November 11, 2022
मौलाना की याद में 11 नवंबर की इस ऐतिहासिक सभा की शुरुआत मौलाना आजाद की ऐतिहासिक तस्वीरों से हुई. इनमें बिस्मल अजीमाबादी के पुत्र शाह महदी हसन का चित्र था, जो वही बिस्मल अजीम अबादी थे, जो अपनी प्रसिद्ध क्रांतिकारी कविता को पढ़ते हुए फांसी पर लटका दिया करते थेः सर फरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए कातिल में है। पटना शहर के इस क्रांतिकारी कवि को गर्व है कि मौलाना आजाद ने बचपन में अपनी ग़ज़ल पर बीस-तीस कविताओं की ग़ज़ल लिखी थी। इन चित्रों में मौलाना आज़ाद की लॉर्ड पेथिक लॉरेंस, लॉर्ड माउंटबेटन और अन्य ब्रिटिश शासकों के साथ बातचीत के विभिन्न दृश्य दिखाई देते हैं, जब वह स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे थे, यह प्रदर्शनी खुदा बख्श पुस्तकालय की तरफ से सजाई गई थी जिसमें मौलाना आज़ाद की अपनी हाथ की लिखी हुई तहरीरें भी थीं।
मौलाना आजाद के अपने हस्तलिखित पत्र, मौलाना आजाद के बचपन और बचपन की तस्वीरें आदि। इस खुदा बख्श प्रदर्शनी में मौलाना आजाद पर लिखी गई पुस्तकों का एक बड़ा खंड भी था। खास बात यह थी कि खुदा बख्श पुस्तकालय ने मौलाना आजाद पर बत्तीस की संख्या में प्रकाशित पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाई, ये अंग्रेजी, उर्दू, हिंदी सभी भाषाओं में हैं। जिसे पढ़ कर मनुष्य में छिपा हुआ जानवर धीरे-धीरे इंसान बनने की कोशिश करता है। ये पुस्तकें धार्मिक भ्रम को दूर करने के लिए सभी धर्मों का परिचय देने और दिलों में सभी धर्मों के सच्चे ज्ञान को स्थापित करने में एक महान भूमिका निभाती हैं जिसमें जैन, बौद्ध, सिख ईसाई, धर्म, इस्लाम के परिचय शामिल हैं। और यह वह साहित्य हैं जो उन्हें एक दूसरे के करीब लाते हैं, इसलिए यह सारा साहित्य एक ही जगह मिल जाता है। पढ़ने और खोजने वाले खोजते रहते हैं कि ‘‘आदमी को भी मयस्सर नहीं इन्सां होना‘‘ (गालिब)। और फिर पढ़ते-पढ़ते उनमें मानवता जाग उठती है।
खुदा बख्श प्रदर्शनी के बाद मौलाना आजाद की याद एक और तरह से जारी रही जब मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों ने मौलाना की उपलब्धियों को याद करते हुए अपने अपने भाषण दिए।
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस समारोह को कोविड के कारण कई वर्षों के लिए टलता रहा, लोगों ने आज मौलाना आजाद के उच्च स्तर के स्मरणोत्सव पर प्रसन्नता व्यक्त की।
इस अवसर पर खुदा बख्श पुस्तकालय द्वारा तैयार की गई मौलाना आजाद बिबलियोग्राफी भी मुख्यमंत्री को भेंट की गई और इन्टरफैथ अन्डर स्टेन्डिंग के लिए एक केंद्र स्थापित करने के लिए पुस्तकालय द्वारा एक मेमोरन्डम भी प्रस्तुत किया। यह राष्ट्रीय शिक्षा दिवस कार्यक्रम श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में धूमधाम से आयोजित किए गया जो दर्शकों और श्रोताओं को युगों-युगों तक याद रहेंगे।


