Md Umar Ashraf
सोच रहा था के नही लिखूँ, पर लिख ही देता हूँ।
8 फ़रवरी 2022 को कर्नाटक के मांड्या में एक हिजाब पहनने वाली छात्रा के ख़िलाफ़ भगवा गमछा-पाटा ओढ़े और उग्र नारेबाज़ी करता समूह एक लड़की का पीछा करता है, बदले में वो अकेली लड़की अपने पूरे दम से इस भीड़ का सामना करती है।
इस पूरे वाक़िये का वीडियो बनता है, जिसे वाइरल किया जाता है, आपने क्या; पूरी दुनिया ने देखा होगा..! उस लड़की का कहना था कि इस पूरे मामले में उसे अपने सहपाठियों और कॉलेज के प्रिंसिपल का समर्थन मिला, यानी वहाँ हिजाब बैन नही था। कई मीडिया हाऊस के लोगों से बात करते हुए उस लड़की ने बताया कि उनके कॉलेज में उन्हें बुर्का पहनने और हिजाब पहनकर क्लास करने की इजाज़त है।
वहीं कर्नाटक के दूसरे शहर उडुपी में, हिजाब पहनने वाली लड़कियों के ख़िलाफ़ भगवा गमछा पहनने वाले लोगों ने कई दफ़ा उग्र प्रदर्शन किया। इसकी शुरुआत तब हुई जब 31 दिसंबर 2021 को उडुपी के सरकारी पीयू कॉलेज में हिजाब पहन कर आई छह छात्राओं को कक्षा में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। इसके बाद कॉलेज के बाहर प्रदर्शन भी हुआ था।
कॉलेज प्रशासन ने 19 जनवरी 2022 को छात्राओं, उनके माता-पिता और अधिकारियों के साथ बैठक की थी। लेकिन इस बैठक का कोई परिणाम नहीं निकला था। इसके बाद उडुपी के विधायक रघुपति भट ने कहा कि जो छात्राएं बिना हिजाब के स्कूल नहीं आ सकती हैं वो ऑनलाइन पढ़ाई करें। और यहीं से मामला तूल पकड़ता चला गया। मुस्लिम लड़कियों ने ऑनलाइन क्लास का विरोध किया। और फिर मुस्लिम छात्राओं हिजाब पहनने के विरोध में हिंदू छात्र-छात्राएं भगवा शॉल और स्कार्फ़ पहन कर कॉलेज में पहुंचने लगे, और ये ख़ुद पहन कर नही आते थे, इन्हें स्कूल के बाहर शॉल और स्कार्फ़ कुछ लोगों द्वारा बाँटा जाता था।
4 फ़रवरी को पीयू कॉलेज में हिजाब पहनकर आने वाली छात्राओं को फिर से रोका गया। इसके बाद 5 फ़रवरी को कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी हिजाब पहनकर स्कूल आने वाली मुस्लिम छात्राओं के समर्थन में आए। उन्होंन एक ट्वीट में कहा कि हिजाब को शिक्षा के रास्ते में लाकर भारत की बेटियों का भविष्य छीना जा रहा है। उसी दिन 5 फ़रवरी को राज्य सरकार ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम 1983 की धारा 133(2) लागू कर दी। इसके अनुसार सभी छात्र-छात्राओं के लिए कॉलेज में तय यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य कर दिया गया। यह आदेश सरकारी और निजी, दोनों कॉलेजों पर लागू किया गया। जिसका विरोध हुआ।
दूसरी तरफ कुंडापुरा के सरकारी पीयू कॉलेज ने कैम्पस में पहले तो हिजाब पहनी लड़कियों को रोका गया, लेकिन लड़कियों ने गेट के बाहर रोज कॉलेज शुरू होने से लेकर ख़त्म होने तक प्रदर्शन किया, जिसके बाद सोमवार यानी 7 फ़रवरी 2022 को मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर आने की अनुमति दे दी गई। साथ ही यह नियम भी लागू किया कि वे अलग क्लास में बैठेंगी। वहीं इसी दिन कर्नाटक के आईडीएसजी कॉलेज चिक्कमंगलूर में हिजाब पहनने वाली छात्राओं के समर्थन में दलित छात्रनीला गमछा पहन कर आ गए हैं।
और इसके बाद सियासत अपने उरूज पर पहुँचा और जो मामला लोकल लेवल पर सॉल्व हो जाता, उसे कांग्रेस के स्टूडेंट विंग एनएसयूआई कोर्ट में ले गई, जिसकी वजह कर जो फ़ैसला आज आया सो आया ही। वैसे इसमें और भी कई तंज़ीमें शामिल हैं।
देखिए हुआ क्या है 8 फ़रवरी 2022 को कर्नाटक के मांड्या में एक बुर्क़ा पहनने वाली छात्रा के ख़िलाफ़ भगवा गमछा-पाटा ओढ़े और उग्र नारेबाज़ी करता समूह हूटिंग करता है, लड़की पलट कर जवाब देती है, इस पूरे वाक़िये का वीडियो वाइरल होता है, लड़की को आइकॉन बनाया जाता है, पर वो विक्टिम नही थी, क्यूँकि उस पर पाबंदी नही थी, उसे क्लास करने और इग्ज़ैम देने से कभी रोका ही नही गया। जहां तक बात हूटिंग की है, ये भारत में गिरी हुई मानसिकता है, जिसका शिकार हर लड़की होती है। बाक़ी लड़की ने पलट कर मज़बूती से जवाब दिया।
लेकिन सब मामले में उडुपी की उन आधा दर्जन को बिल्कुल ही ग़ायब कर दिया गया जो सच में अपने हक़ के लिए लड़ रही थीं, प्रदर्शन कर रही थी, और प्रशासन के ज़ुल्म का शिकार हो कर अपना करियर दाव पर लगा रही थीं। उन्हें हिजाब पहन कर क्लास में अलाउ नही किया गया। साल उनका बर्बाद हुआ।
अब पूछिएगा मै ये लिख क्यूँ रहा हूँ?? ख़ास कर लास्ट का दो पैराग्राफ़। तो मामला कुछ यूँ है की वंचित बहुजन आघाडी के प्रकाश अम्बेडकर और उनकी टीम उस लड़की को जिसे आइकॉन बनाया गया, को औरंगाबाद लाना चाहते थे, क्यूँ लाना चाहते थे?? भाजपा ने विरोध शुरू किया।
अब मामला ये हुआ की उनके औरंगाबाद आने पर सेक्शन 144, IPC सेक्शन 188, 269, 270 और 271 के तहत कारवाई की नोटिस पुलिस कमिश्नर द्वारा थमा दी गई है। कर्नाटका पुलिस के इंटेलिजेंस की उस लड़की के घर के बाहर कड़ी नज़र, जिसके बाद वंचित बहुजन आघाडी ने पुलिस कमिश्नर के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ में पेटिशन दाखिल की गई। शायद वो लड़की अब औरंगाबाद नही जाए, तो अब वंचित बहुजन आघाडी द्वारा उस लड़की की एक कट & एडिट की हुई विडीओ शेयर किया जा रहा है।
मतलब आप समझ रहे के किस लेवल पर सियासत चल रहा है? वामपंथीयों ने जिनकी पूरी लड़ाई ही औरतों की आज़ादी के नाम पर है, ने केरेला से लेकर बंगाल तक हेजाब के फ़ेवर में जुलूस निकाल दिया। अब पूछिएगा यहाँ पर मिल्ली तंज़ीम कहाँ हैं? सब आइकॉन बनी लड़की के यहाँ फ़ोटो खैंचवाने पहुँच गए, कोई पाँच लाख रुपया दे आया। ओवैसी जैसे लोग ने यूपी चुनाव में उस लड़की नाम भुनाया। और जिन लड़कियों ने हिजाब के लिए असली जद्दोजहद की उन्हें कोई जानता नही।
अगर आप मेरी नज़र से देखें तो यहाँ मुसलमानो को हमेशा की तरह इंधन बनाया गया है। और इसके लिए मुसलमान ख़ुद भी ज़िम्मेदार हैं, क्यूँकि Advocacy के लिए ज़मीन पर उतर कर काम करने की जगह मेरी तरह सोशल मीडिया को हक़ीक़त मान के अपना काम चला लेते हैं।
बाक़ी इस्लाम में सतर ढकना मर्द और औरत दोनो पर फ़र्ज़ है, जो इसमें घोल मोल करेगा, क़यामत के दिन उसे अल्लाह के सामने हिसाब देना पड़ेगा। ये हमारा ईमान है। अल्लाह फ़ित्ना और शर से हमारी हिफ़ाज़त फ़रमाए।


