– Afzal Haider
भाई मैं खुद एक MBBS डाक्टर हुँ और सऊदी में तकरीबन 14 सालों से ICU में कार्यरत भी हुँ।
पर मैं खुद तकरीबन 35 वर्षों से एलोपैथिक दवाईयों के साथ साथ ही होम्योपैथिक पर प्रैक्टिस भी कर रहा हुँ। अपने घर पर और अपने बच्चों पर होम्योपैथिक दवाई ही इस्तेमाल भी करता हुँ। यदा कदा होम्योपैथिक के पक्ष में भी पोस्ट लिखता भी रहता हुँ।
होम्योपैथिक दवाई श्रेष्ठतम दवाईयों में से एक है। पर इसके कामयाब और अच्छे डाक्टरों की भारी कमी है। इसके अधिकतर डाक्टर वैसे लोग हैं जो अपने स्कूल के Last bencher students रहें हैं जो आज के दौर में clerck /peon की भी नौकरी के योग्य नहीं रहे हैं। तो ऐसों से हम होम्योपैथिक के अच्छे सलाह की कैसे उम्मीद कर सकते हैं।
दुसरी बात यह है कि होम्योपैथिक का अविष्कार अठारहवीं शताब्दी के अंत में जर्मनों द्वारा जर्मनी में हुआ था, न कि अंग्रेजों द्वारा इंग्लैंड में हुआ।
पर होम्योपैथिक और जर्मनों दोनों का दुर्भाग्य यह हुआ कि बीसवीं शताब्दी में दो बार जर्मनों का विश्वयुद्ध में अंग्रेजों से हार हुई । जिसका परिणामस्वरूप जर्मनी और होम्योपैथिक दोनों बर्बाद हुए।
अब यह अंग्रेज और यहुदी वर्ग कैसे बर्दाश्त कर सकता था कि जिस बिमारी के इलाज में लाखों की कमाई हो, उसका इलाज चंद रुपयों में होम्योपैथिक दवाई से करने की इजाज़त दे दे।
मैंने खुद करोना का सफल इलाज हजारों मरीज़ों में होम्योपैथिक दवाई से किया है।
Heart attack में Thrombolytic medicine (Alteplase/Reteplase), Morphine (श्रेष्ठतम analgesic), से तकरीबन चार घंटों तक जुझने के बाद भी जब मरीज़ को आराम नहीं मिला तो उसे मैंने अपनी होम्योपैथिक दवाई से महज़ 1 से 2 मिनट में आराम दिलाया। यह मामला मेरे एक मित्र का दिल्ली के G B Pant hospital का अभी नवंबर का है।
असल में यह दवाईयों की माफियाओं का अपनी ज़ाती मुफ़ाद में wrong mental feeding and brain wash है कि होम्योपैथिक दवाईयाँ काम ही नहीं करती हैं। हद तो यह है कि यह खुद एक लम्बे समय तक हम डाक्टरों का भी brain wash करती रही है कि genric medicine में दवाई की जगह खड़ीया (chalk) , सत्तु जैसी बेकार सी चीजें भरी रहती हैं और वह काम ही नहीं करती हैं जबकी बाद में यह सब चीजें गलत साबित हो चुकी हैं कि generic medicines भी उतना ही काम करती हैं जितना patent medicines काम करती हैं। सब कुछ marketings का ही कमाल है।
दुर्भाग्यवश आज हमारे समाज का शिक्षित वर्ग, खासकर एलोपैथीक डाक्टर वर्ग होम्योपैथिक दवाई को बिल्कुल ही नहीं मानता है।


