Shubhneet Kaushik
हत्या और बलात्कार जैसे संगीन मामलों में जेल की सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम को पहले पेरोल पर रिहा करना और फिर जेड-प्लस सुरक्षा देकर भाजपा सरकार द्वारा समूची न्याय प्रक्रिया और क़ानून-व्यवस्था का मखौल उड़ाया जा रहा है। जब पत्रकारों पर हमले दिन-ब-दिन बढ़ रहे हों, तब अपराधियों पर अंकुश लगाने की बजाय पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में दोषी पाए गए राम रहीम को जेड-प्लस सुरक्षा देना ऐसे अपराधियों को सीधे-सीधे शह देना है।
ये पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ही थे, जिन्होंने हरियाणा के सिरसा से निकलने वाले सांध्य दैनिक ‘पूरा सच’ में राम रहीम की काली करतूतों और शिष्याओं के साथ बलात्कार के मामले का पर्दाफ़ाश किया था। मई 2002 में रामचंद्र छत्रपति ने ‘पूरा सच’ में राम रहीम द्वारा डेरे में रहने वाली साध्वियों के साथ दुराचार का प्रकरण सामने लाया था। उल्लेखनीय है कि डेरे की एक साध्वी द्वारा डेरा प्रमुख पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए एक चिट्ठी प्रधानमंत्री को भेजी गई थी, जिसकी प्रतियाँ पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भी भेजी गई थी। रामचंद्र छत्रपति ने इस ख़बर को 30 मई 2002 को ‘पूरा सच’ में प्रमुखता से छापा था। उस दिन दो ख़बरें ‘पूरा सच’ के पहले पन्ने पर छपी थीं। ‘कार चालक के हठ ने खोल दिया धार्मिक डेरे का कच्चा चिट्ठा’ और ‘धर्म के नाम पर किए जा रहे हैं साध्वियों के जीवन बर्बाद’।
फ़तेहाबाद से छपने वाले सांध्य दैनिक ‘लेखा जोखा’ के कार्यकारी संपादक आर॰के॰ सेठी ने भी 6 जून 2002 को ‘लेखा जोखा’ में एक लेख लिखकर इस मामले को उठाया था। जिसके बाद राम रहीम के समर्थकों द्वारा ‘लेखा जोखा’ के कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की गई थी।
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने राम रहीम और उसके समर्थकों द्वारा लगातार दी जा रही धमकियों और जान के ख़तरे की परवाह न करते हुए ‘पूरा सच’ में राम रहीम का पर्दाफ़ाश जारी रखा। पाँच महीने बाद 24 अक्टूबर, 2002 को रामचंद्र छत्रपति पर गोलियों से जानलेवा हमला किया गया, जिसमें वे गम्भीर रूप से घायल हुए। हमले के 28 दिनों बाद 21 नवम्बर, 2002 को रामचंद्र छत्रपति का निधन हो गया।
यह रामचंद्र छत्रपति की पत्नी कुलवंत कौर और उनके बेटे अंशुल छत्रपति का अडिग साहस और प्रतिबद्धता ही थी कि उन्होंने दो दशकों तक नेताओं, अपराधियों और पाखंडी धर्मगुरुओं के इस गठजोड़ का मुक़ाबला किया। और राम रहीम को अदालत में सजा दिलाने में सफल रहे। आख़िरकार जनवरी 2019 में अदालत ने राम रहीम को रामचंद्र छत्रपति की हत्या मामले में दोषी पाया था। ‘समयांतर’ के दिसम्बर 2017 के अंक में पत्रकार मित्र धीरेश सैनी ने एक लेख रामचंद्र छत्रपति और ‘पूरा सच’ के सरोकारों के बारे में लिखा था, जिसे पढ़ा जाना चाहिए।
अभी हाल ही में 10 फ़रवरी, 2022 को रामचंद्र छत्रपति की पत्नी कुलवंत कौर का निधन हो गया। और अभी राम रहीम को पेरोल पर रिहा किए जाने और जेड-प्लस सुरक्षा देने की यह ख़बर। भाजपा सरकार का यह क़दम समूची न्याय व्यवस्था, क़ानून और अदालतों के साथ-साथ भारतीय लोकतंत्र पर भी सवालिया निशान खड़े करता है।


