Opinion

अमझर शरीफ और देवकुंड की सदियों पुरानी मोहब्बत की रिवायत फिर हुई जीवंत, 80 साल बाद दो संत परंपराओं का मिलन

देवकुंड/अमझर शरीफ: बिहार के औरंगाबाद जिले में अमझर शरीफ की खानकाह कादरिया मुहम्मदिया और देवकुंड मठ के बीच सदियों से चली आ रही संत-सूफी परंपरा, आपसी सम्मान और भाईचारे...

Barkatullah University Must Remain Barkatullah University

Ali Nadeem Rezavi  The idea of changing the name of Barkatullah University in Bhopal might...

आज़ादी के लिए 45 साल वतन से दूर रहने वाले बरकतुल्लाह भोपाली का नाम क्यों मिटाया जा रहा है?

एक तरफ़ सरकार आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाएगी, दूसरी जानिब आज़ादी के अज़ीम रहनुमा...

Urdu Scholar Prof. Md. Zahidul Haque Appointed Director of Khuda Bakhsh Oriental Public Library

Patna, June 1, 2026: Renowned Urdu scholar, literary critic, poet, and academician Professor Md....

Why wasn’t Sarfarosh a propaganda movie?

Why wasn't Sarfarosh a propaganda movie? Naseeruddin Shah, a darling of the Indian left-liberal, played...

दिलीप कुमार, एक्टिंग की यूनिवर्सटी रहे

वीर विनोद छाबड़ाआज अभिनय सम्राट दिलीप कुमार का 98 साल की उम्र में निधन से सिनेमा इंडस्ट्री बहुत उदास है. उनके निधन के साथ...

विकल्प व सम्भावनाओं की तलाश करने वाला राजनेता : किशन पटनायक

Shubhneet Kaushikआज भारत में समाजवादी आंदोलन की एक प्रखर आवाज़ रहे विचारक व राजनेता किशन पटनायक (1930-2004) का जन्मदिन है। आज के दौर में...

1857 का विद्रोह और सूबेदार सीताराम की आपबीती

By Shubhneet Kaushik सन सत्तावन के विद्रोह को उसकी समग्रता में समझने के लिए विष्णुभट्ट गोडसे, मिर्ज़ा ग़ालिब, सैयद अहमद खाँ और सत्तावनी क्रांति से...

इमर्जेंसी की सालगिरह और स्मरण जेपी आंदोलन की—

शिवानन्द तिवारी 18 मार्च 1974 को छात्रों और युवाओं के द्वारा बिहार आंदोलन की शुरुआत हुई थी. आंदोलन का नेतृत्व करने वाले छात्र युवा नेताओं...

आपातकाल के दरम्यान जार्ज फ़र्नाडिस की गतिविधियों का कोई अर्थ नहीं था. वह एक तरह का एडभेंचरिज्म था.

शिवानन्द तिवारी आपातकाल के दरम्यान जार्ज फ़र्नान्डिस की गतिविधि का कोई अर्थ नहीं था. जैसे कोई युवा बगैर आगे-पीछे सोचे ‘थ्रील’ महसूस करने के...

“और बहुत आएंगे! हम आखिरी थोड़े ही हैं “

Shyam Meera Singh पुलिस की बंदूक द्वारा मरने से पहले "निषाद" के मुंह से निकली ये अंतिम पंक्तियां ही फ़िल्म "आर्टिकल 15" के आगे की...

निकाह, तलाक़, हलाला और ख़ुला के बारे में भ्रान्तियाँ दूर करने की ज़रूरत है।

Mohd Zahid भारतीय संविधान ही नहीं पूरी दुनिया के व्यवस्था की पड़ताल कर लीजिए हर जगह यदि कुछ सुविधाएं दी गई हैं तो उन सुविधाओं...

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