जनता की याददाश्त बहुत कम होती है और उसपर भी भारतीय मुस्लिम जनता की बात हो तो उनकी तो याददाश्त होती भी है यह भी एक सवाल है। आजकल बहुत से मुस्लिम लड़के लड़कियों को बिहार में प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) नाम का नया मसीहा मिला है। जिसकी वीडियो शेयर होती हैं यह बताते हुए कि पैग़ंबर मुहम्मद की सियासत पर क्या राय थी। यह वीडियो शेयर करने वाले वही हैं जिनको लगता है कि पूरी ज़िन्दगी क़ुरान और हदीस पढ़ने वाले उलेमा रसूल-अल्लाह की सियासी बातों को ग़लत समझते हैं।
ख़ैर जो भी हो। असल में जो लोग प्रशांत किशोर के पीछे नज़र आ रहें हैं वो ख़ुद को मोदी सरकार के ख़िलाफ़ दिखाने का दावा भी रखते हैं। यह लोग भारत की ज़्यादातर परेशानियों की वजह मोदी सरकार को मानते हैं और इनके हिसाब से 2014 के बाद मुल्क के हालात ख़राब हुए हैं। अब यही लोग प्रशांत किशोर की महफ़िलों में नज़र आते हैं।
प्रशांत किशोर के गुणगान करने वाले जनता को बेवक़ूफ़ समझते हैं या ख़ुद को
ऐसे में मैं अकसर सोचता हूँ कि या तो ये सब प्रशांत किशोर के गुणगान करने वाले जनता को बेवक़ूफ़ समझते हैं या इनकी ख़ुद की अक़्ल को ही ताले पड़ गए हैं।
मान लीजिए मोदी सरकार का 2014 में सत्ता में आना मुल्क के लिए बुरा था और जनता उस से परेशान है तो कोई इनसे ये पूछे के प्रशांत किशोर 2014 में क्या कर रहे थे ? प्रशांत किशोर की भूमिका 2014 के चुनाव में मोदी जी को जिताने में कितनी एहम थी इसका अंदाज़ा 18 जून 2014 की scroll.in की एक रिपोर्ट से लगाया जा सकता है जिसमें प्रशांत किशोर(Prashant Kishor) और उसके संगठन को इस बात की दाद दी गयी थी के आरएसएस के साथ मिलकर चुनाव की सारी रणनीति मोदीजी के लिए वही बना रहे थे। मीडिया क्या बोलेगा यह भी यही तय कर रहे थे।
सच तो यह है कि प्रशांत किशोर मशहूर ही इस वजह से हुए कि उन्होंने 2014 की भाजपा की जीत में ख़ास रोल निभाया था। ऐसे में अगर किसी को लगता है कि मोदीजी की सरकार का 2014 में बनना ग़लत था तो आप उस चुनाव के सबसे अहम रणनीतिकार को सभी आरोपों से बरी की बिना पर करते हैं ?
चलिए कुछ लोग कहते हैं कि नहीं तब प्रशांत किशोर पैसे के लिए काम कर रहे थे और अब उनको समाज की फ़िक्र है। अच्छा यानि कि पैसा कमाने के लिए आप किसी भी विचारधारा के साथ जा सकते हैं। तो ऐसे में आपको मीडिया पर बिकने का आरोप नहीं लगाना चाहिए। वो भी तो सिर्फ़ पैसा कमा रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने असल में देश की राजनीती को पूंजीवाद की तरफ धकेल दिया है।
कुछ लोग कहेंगे कि प्रशांत किशोर तब नासमझ थे। वैसे ही जैसे शेहला दूसरे ख़ेमे में थी। लेकिन कमसेकम शेहला खुल कर कह रही हैं कि वो पहले ग़लत थी। प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) कभी नहीं कहते। और कह भी दें तो क्या आप ऐसे इंसान को नेता या लीडर तसलीम करेंगे जिसको अपने सामने होने वाली सियासत तक न समझ आती हो और उसको कई साल लगे हों समझने में?
लीडर तो असल में वो होता है जो हवा के बहने से पहले भांप कर अपने लोगों को आगाह कर दे। ऐसा वो कौन सा मंत्र दे रहे हैं जो आपको नहीं पता ? राष्ट्रीय जनता दल में परिवारवाद का मुद्दा भाजपा 30 साल से लिए खड़ी है। नीतीश विचारधारा विहीन हैं ये भी अरसे से सबको पता है। बिहार में मुस्लिम राजनीती हाशिये पर है ये भी कोई नया इल्म नहीं। तो आपको प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने क्या बताया ?
प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने असल में देश की राजनीती को पूंजीवाद की तरफ धकेल दिया है। एक टीम प्रोफेशनल्स की नौकरी पर रखी जाती है। सोशल मीडिया मैनेज होता है। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। पैसे पर लोग नौकरी करते हैं। इसने यह तय किया है कि हिंदू हो या मुसलमान, राजनीती वही करेगा जिसके पीछे पूंजीपति होंगे। और आप खुद जानते हैं कि ऐसा होने से मुस्लिम की भागीदारी घटेगी, बढ़ेगी नहीं। हाँ कुछ अंग्रेज़ी बोलते हुए नाम निहाद के मुसलमान नेता बनाये जाएंगे।
सवाल बहुत हैं लेकिन सवाल करेगा कौन ?


